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Blogs >> Tags >> पत्रकारिता
  [ 21 ]  posts tagged with ....  पत्रकारिता
जब सवाल जाति का हो तो क्या सेकुलर(?) और क्या संघी  
1st February 2010  
Added by : दिलीप मंडल  
Tags : दिलीप मंडल, मीडिया, पत्रकारिता, rss, अंबेडकर, आरक्षण  
जब वर्धा में प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त करने का आदेश जारी किया जा रहा था, लगभग उन्हीं दिनों दूर दक्षिण में मैंगलोर यूनिवर्सिटी में भी ऐसा ही एक फैसला हो रहा था। एक यूनिवर्सिटी केंद्र सरकार की है और दूसरी यूनिवर्सिटी एक ऐसे राज्य में...  
   
पत्रकारिता पर ऑनलाईन पुस्तिका : महादेव देसाई  
17th December 2009  
Added by : अफ़लातून  
Tags : journalism, mahadev desai, अखबार, आनलाईन पुस्तिका, ऑनलाईन पुस्तिका, पत्रकारिता, महादेव देसाई, रिपोर्टिंग, समाचार, समाचार पत्र, newspaper, online booklet  
१९३६ में गुजरात साहित्य परिषद के समक्ष परिषद के पत्रकारिता प्रभाग की रपट महादेव देसाई ने प्रस्तुत की थी । उक्त रपट के प्रमुख अनुदित हिस्से इस ब्लॉग पर मैंने दिए थे । नीचे की कड़ी ऑनलाईन पीडीएफ़ पुस्तिका के रूप में पेश है । मुझे उम्मीद है कि पीडीएफ़...  
   
शब्द महर्षि और क्रिकेट मैच-हिन्दी आलेख (shabda maharshi aur cricket match-hindi lekh)  
11th November 2009  
Added by : दीपक भारतदीप  
Tags : deepak bapu, deepak bharatdeep, e-patrika, bharat, blogger, friends, hindi megzine, india, inglish, internet, mastram, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web nav bharat, web panjab kesri, web patrika, web times, अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, शब्द, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, कला, क्रिकेट मैच, पत्रकारिता, संपादकीय, हिंदी साहित्य, cricket match, editorial, hindi article  
उन महान शब्द ऋषि की मृत्यु की खबर ने स्तब्ध कर दिया। यह लेखक घर से बाहर अपने काम पर जाने की तैयारी कर रहा था। उसी समय टीवी पर यह खबर दिखाई दी। खबर यह थी कि‘अपने प्रिय खिलाड़ी के आउट होने के बाद भारतीय टीम की हार का सदमा उनसे सहन नहीं...  
   
ब्लाग लोकतंत्र का पांचवां नहीं चौथा स्तंभ ही है-आलेख (blog is forth pillar-hindi article)  
26th October 2009  
Added by : दीपक भारतदीप  
Tags : हिंदी साहित्य, संपादकीय, मनोरंजन, पत्रकारिता, समाज, hindi article, editorial, फिल्म, क्रिकेट  
भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इसे साढ़े बारह करोड़ बताते हैं। इन प्रयोक्ताओं को यह अनुमान नहीं है कि उनके पास एक बहुत बड़ा अस्त्र है जो उनके पास अपने अनुसार समाज बनाने और चलाने की...  
   
वक्त बदल गया है, आप भी बदलिए!  
1st September 2009  
Added by : दिलीप मंडल  
Tags : पत्रकारिता  
प्रभाष जोशी और राजेंद्र यादव,मेरे करीबी रिश्तेदारों में कई जातियों के लोग हैं। ब्राह्मण से लेकर कायस्थ और नायर से लेकर दलित तक। ये सभी सभी परिवार प्रेम से रह रहे हैं। आपके परिवारों में भी लोगों ने प्रेम किया होगा और कई ने जाति से बाहर शादियां भी...  
   
ये वक्त के साथ खुद को बदल नहीं पाए!  
1st September 2009  
Added by : दिलीप मंडल  
Tags : पत्रकारिता  
प्रभाष जोशी और राजेंद्र यादव,मेरे करीबी रिश्तेदारों में कई जातियों के लोग हैं। ब्राह्मण से लेकर कायस्थ और नायर से लेकर दलित तक। ये सभी सभी परिवार प्रेम से रह रहे हैं। आपके परिवारों में भी लोगों ने प्रेम किया होगा और कई ने जाति से बाहर शादियां भी...  
   
प्रचण्ड और भारतीय अख़बारों का सुर  
28th July 2009  
Added by : Rajesh Joshi  
Tags : पत्रकारिता, नेपाल, nepal, हिंदी, माओवादी, अख़बार, media, hindi, maoists  
मुद्दा थोड़ा पुराना ज़रूर है मगर अप्रासंगिक नहीं. इसीलिए कबाड़ख़ाने के पाठकों के लिए यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है. नेपाल में जिन परिस्थितियों में कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल 'प्रचण्ड' ने इस्तीफ़ा दिया उससे एक बड़ी बहस शुरू हुई. यहाँ...  
   
मीडिया का बढ़ता मुनाफा व पत्रकारिता की बदलती परिभाषा  
10th July 2009  
Added by : Rajesh06sri@gmail.com (Srirajesh)  
Tags : श्रीराजेश, मीडिया, पत्रकारिता  
श्रीराजेशएक बंधु ने अपने ब्लाग (http://shyamnranga।blogspot.com) पर सूचना दी है कि मूल रूप से बीकानेर के रहने वाले और अब मुंबई प्रवासी श्याम लाल जी दम्माणी को विभिन्न अखबारों में संपादक के नाम पत्र लिखने के लिए उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में...  
   
टाइम मशीन में लालगढ़ और एसपी सिंह  
5th July 2009  
Added by : दिलीप मंडल  
Tags : मीडिया, पत्रकारिता, लालगढ़, एस पी सिंह  
लालगढ़ ने मीडिया के सामने कुछ सवाल खड़े किए हैं। इस बारे में hoot में सेवंती नैनन ने लिखा है। पक्ष और पक्षपात की सवाल मीडिया को लेकर न पहली बार उठे हैं न आखिरी बार। हाल ही में हमने पत्रकार एसपी सिंह की 12वीं बरसी मनाई है। एसपी सिंह की स्मृति में...  
   
'10 लाख रुपये भेज दो, खबर नहीं चलेगी'  
2nd July 2009  
Added by : Yashwantdelhi@gmail.com (यशवंत सिंह Yashwant Singh)  
Tags : रिकार्डिंग, खुलासा, अभी-अभी, भड़ास4मीडिया, पत्रकारिता, ब्लैकमेलिंग  
सुन लिया आपने!खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें- ब्लैकमेलिंग में फंसे दो पत्रकार  
   
12 साल बाद क्यों याद करें एसपी को  
26th June 2009  
Added by : दिलीप मंडल  
Tags : पत्रकारिता, एस पी सिंह, यादें  
जैसा कि एसपी यानी सुरेंद्र प्रताप सिंह ने अपने आखिरी बुलेटिन में कहा था कि ...”लेकिन जिंदगी तो चलती रहती है” और बकौल संवेदनशील कहे जाने वाले कवि अशोक वाजपेयी के, “मरने वाले के साथ कोई मर नहीं जाता,” इस निर्मम-निष्ठुर समय में कुछ लोग एसपी को याद...  
   
पहाड़ की खुशी और गम को समझने का नया मंच  
9th May 2009  
Added by : दिलीप मंडल  
Tags : ब्लॉगर, पत्रकारिता, ब्लॉगिंग  
एस राजेन टोडरिया उन लोगों के लिए परिचय के मोहताज नहीं हैं, जिनकी दिलचस्पी पहाड़ के सुख-दुख को जानने समझने और उनके साथ एकाकार होने में हैं। टिहरी में हुए विस्थापन की सबसे तेज तर्रार रिपोर्टिंग करने वाले रिपोर्टर से एक प्रखर संपादक की लंबी यात्रा...  
   
किरानी , पत्रकार , लेखक : ले. किशन पटनायक  
21st April 2009  
Added by : अफ़लातून  
Tags : hind swaraj, journalism, media, news, अभिव्यक्ति, पत्रकार, पत्रकारिता, लेखक  
Technorati tags: Technorati tags: अखबार, पत्रकार, अभिव्यक्ति, संचार, किशन पटनायक, kishan patanayak, newspapers, expression, press, freedom, journalists ( लेख का पिछला भाग ) पत्रकारों में एक निपुणता होती है । उनकी भाषा चुस्त होती है । वे तर्क और...  
   
पत्रकारिता की दुनिया में हैं कई और विसंगतियां  
19th April 2009  
Added by : डा.मान्धाता सिंह  
Tags : कोलकाता प्रेस क्लब, पत्रकारिता  
पत्रकारिता की दुनिया में कई और विसंगतियां हैं। मसलन अखबार निकालने और खबरों को संपादित करके एक बेहतर तेवर देने वाले संपादक भी पत्रकारिता के ही काम करतेहैं मगर उन्हें शासन की तरफ से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की श्रेणी में नहीं रखा जाता। उपसंपादक से...  
   
वीरेन डंगवाल ने अमर उजाला, बरेली के स्थानीय संपादक पद से इस्तीफा दिया  
17th April 2009  
Added by : Ashok Pande  
Tags : पत्रकारिता, समाज  
कवि-पत्रकार और हमारे शीर्ष कबाड़ी वीरेन डंगवाल ने हाल में ही 'अमर उजाला', बरेली की सम्पादकी से इस्तीफ़ा दे दिया. ऐसा जिन कारणों के चलते करना पड़ा वे न केवल बेहद शर्मनाक हैं, देसी-वर्नाकुलर अख़बारों के मालिकों के स्वार्थों की पोल भी खोलते हैं, जिनके...  
   
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