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Blogs >> Tags >> deepak bapu
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| [ 122 ] posts tagged with .... deepak bapu |
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| तकदीर और चालाकियां-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (taqdir aur chalaki-hindi comic poems |
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| 2nd February 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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अपने गम और दूसरे की खुशी पर मुस्कराकर
हमने अपनी दरियादिली नहीं दिखाई।
चालाकियां समझ गये... |
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| संत कबीर के दोहे-प्रेम प्रसंग कभी छिपते नहीं |
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| 31st January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://anantraj.blogspot.com
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पर नारी पैनी छुरी, विरला बांचै कोय
कबहुं छेड़ि न देखिये, हंसि हंसि खावे रोय।
संत कबीर दास जी कहते हैं कि दूसरे की स्त्री को अपने लिये पैनी छुरी ही समझो।... |
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| गरीबी महफिल में खूब फबती-हिन्दी शायरी (garibi aur mahfil-hindi shayri) |
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| 29th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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वफा हम सभी से निभाते रहे
क्योंकि गद्दारी का नफा पता न था।
सोचते थे लोग तारीफ करेंगे हमारी
लिखेंगे अल्हड़ों में नाम, पता न था।... |
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| कंप्यूटर विज्ञान का ज्ञाता कैसा हो-हिन्दी व्यंग्य |
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| 24th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| अमेरिकन लोगों का विश्वास है कि अगला बिल गेट्स भारत या चीन में पैदा होगा। यह एक सर्वे करने वाली एक ऐजेंसी ने बताया है। जहां तक चीन का सवाल है उसकी वर्तमान व्यवस्था में यह संभव नहीं लगता कि कोई एकल प्रयासों से ऐसा कर लेगा। फिर यह भी पता नहीं कि... |
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| हिन्दू धर्म संदेश-अन्य लोगों के काम करने पर मिलती है इज्जत |
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| 24th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| स्वारथ सूका लाकड़ा, छांह बिहना सूल।
पीपल परमारथ भजो, सुख सागर को मूल।।
संत कबीरदास जी का कहना है कि स्वार्थ तो सूखी लकड़ी के समान हैं जिसमें न तो छाया मिलती है और न ही सुख। एक तरह से वह कांटे की तरह है। इसके विपरीत परमार्थ पीपल के पेड़ के समान हैं जो... |
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| दिल और दुनिया-हिन्दी शायरी |
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| 18th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| रिश्ते किसी तरह निभाऐं,
दिल में न हो पर
दुनियां को दिखाऐं।
सभी टूटे हुए हैं जमाने से
पर छिपा रहे हैं
आप भी छिपायें।
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अपनी नीयत में कभी खोट
नहीं पालना
जला कर राख कर देगा।
छलियों पर नज़र रखना पर
छल को दिल में जगह
कभी मत देना... |
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| हिन्दी के ब्लाग क्रिकेट मैच से पिट जाते हैं-व्यंग्य चिंत्तन |
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| 17th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| वह हमारा मित्र है बचपन का! कल हम पति पत्नी उसे घर देखने गये। कहीं से पता लगा कि वह बहुत बीमार है और डेढ़ माह से घर पर ही पड़ा हुआ है।
घर के बाहर दरवाजे पर दस्तक दी तो उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और देखते ही उलाहना दी कि ‘आप डेढ़ महीने बाद... |
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| धर्म का बाज़ार सजाने की कोशिश-हिन्दी आलेख (dharma ka bazar-hindi lekh) |
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| 12th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| धार्मिक सत्संगों का आयोजन कोई सरल और सस्ता काम नहीं है। प्रबंधन एक कला है और जिस आदमी को कोई आर्थिक व्यवसाय करना हो तो केवल उसे संबंधित क्षेत्र की जानकारी के साथ प्रबंध का ज्ञान होना चाहिए तो वह अच्छा काम कर लेता है पर अगर प्रबंध क्षमता का... |
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| कामयाबी का खिताब-हिन्दी व्यंग्य कविता |
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| 10th January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर
वह रोज फूल जाते हैं।
मगर उनके ऊपर भी साहब हैं
जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं।
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नयी दुनियां में पुजने का रोग
सभी के सिर पर चढ़ा है।
कामयाबी का खिताब
नीचे से ऊपर... |
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| इशारों के बंधन-हिन्दी व्यंग्य शायरी |
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| 2nd January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| हांड़मांस के बुत हैं
इंसान भी कहलाते हैं,
चेहरे तो उनके अपने ही है
पर दूसरे का मुखौटा बनकर
सामने आते हैं।
आजादी के नाम पर
उनके हाथ पांव में जंजीर नहीं है
पर अक्ल पर
दूसरे के इशारों के बंधन
दिखाई दे जाते हैं।
नाम के मालिक हैं वह गुलाम
गुलामों पर... |
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| यह कैसी चरित्र चर्चा-आलेख (discussion on corector-hindi article) |
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| 2nd January 2010 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| ज्यादा देखने से फायदा भी क्या था? जितना देखा उससे ही समझना काफी था। एक चेहरा निढाल पड़ा हुआ है कोई नारी या नारियां बार बार अपना चेहरा उसके पास ले जाती हैं। वह एक सनसनीखेज खबर है। 86 वर्ष के बुजुर्ग राजनीतिज्ञ पर यौन प्रकरण (sex scandle) का आरोप... |
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| नाम के मालिक-व्यंग्य हिंदी शायरी |
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| 30th December 2009 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| सुंदरता अब सड़क पर नहीं
बस पर्दे पर दिखती है
जुबां की ताकत अब खून में नहीं
केवल जर्दे में दिखती है।
सौंदर्य प्रसाधन पर पड़ती
जैसे ही पसीने की बूंद
सुंदरता बह जाती,
तंबाकू का तेज घटते ही
जुबां खामोश रह जाती,
झूम रहा है वहम के नशे में सारा जहां
औरत की... |
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| अमीर की विलासिता और गरीब की हाय-हिन्दी व्यंग कवितायें(amir ki vilasita-hindi vyang kavita) |
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| 26th December 2009 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| बड़े लोगों की होती है बड़ी बातें।
छोटा तो दिन में भी
छोटी शर्म का काम करते भी घबड़ाये
बड़ा आदमी गरियाता है
गुजारकर बेशर्म रातें।।
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छोटे आदमी की रुचि
फांसी पर झूले
या लजा तालाब में डूबे
बड़ा आदमी अपनी रातें गरम कर
कुचलता है... |
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| विज्ञान और ज़माना-हिन्दी व्यंग्य शायरी (vigyan aur zamana) |
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| 20th December 2009 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| धरती का खुदा
नहीं है बंदों से जुदा।
फिर भी धरती को बचाने के लिये
चंद लोग एकत्रित हो जाते हैं
कभी कोपेनहेगन तो कभी
रियो-डि-जेनेरियों में
महंगी महफिलें सजाते हैं
बिगाड़ दिया है दुनियां का नक्शा
अब फिर तय करने लगे है नया चेहरा
बन रहे नये... |
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| रौशनी की कीमत-छोटी हिंदी कहानी (value of light-hindi short story |
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| 19th December 2009 |
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| Added by : दीपक भारतदीप |
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| बड़े शहर के विशाल मकान में रहने वाला वह शख्स एक दिन बरसात के दिनों मे गांव की ओर जाने वाली पगंडडी पर पानी मे अंधेरे में कांपते हुए कदम रखता हुआ आगे बढ़ रहा था। दरअसल शाम के समय वह बस मुख्य सड़क पर उतरा था उस समय बरसात धीरे शुरु हुई थी। उसे... |
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